काश !
Tuesday, 15 July 2014
Family:
हर बार सम्हाल लूँगा, गिरो तुम चाहो जितनी बार ।
बस इल्तजा एक ही है, कि मेरी नज़रों से ना गिरना ।
काश ! बचपन में तुझे मांग लेते,
हर चीज़ मिल जाती थी,
दो आँसू बहाने से…
Home
Subscribe to:
Comments (Atom)